सत्र के दौरान महिलाओं और किशोरियों को यह समझाया गया कि अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखें। इसके साथ ही मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों को सैनिटरी पैड के सुरक्षित एवं उचित निपटान (डिस्पोज़ल) के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया।
उन्हें समझाया गया कि उपयोग किए गए पैड को कागज में अच्छी तरह लपेटकर निर्धारित कूड़ेदान में डालना चाहिए तथा खुले स्थानों, नालियों या जल स्रोतों में नहीं फेंकना चाहिए, क्योंकि इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
सत्र में महिलाओं एवं किशोरियों ने सक्रिय सहभागिता की, उन्होने प्रोजेक्ट असिस्टेंट ज्योति सिंह से अपने प्रश्न पूछे तथा उपरोक्त विषय से संबंधित अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान बाल रक्षा भारत के सखी सहायक निशा शर्मा , चंद्री हिंदुस्तानी, विकास श्रीवास्तव तथा सुनीता सिंह द्वारा जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से समुदाय में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया