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सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ के क्रियात्मक (ऑपरेटिव) निर्देशों को बरकरार रखा I


फुरसतगंज अमेठी।
कुलपतिराजीव गाँधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालयएवं भारत संघ बनाम जितेंद्र सिंह पूर्व प्रथम कुलसचिव-राजीव गाँधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय

दिनाक 21 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कुलपति- राजीव गाँधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय, भारत संघ बनाम जितेंद्र सिंह के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ के क्रियात्मक (ऑपरेटिव) निर्देशों को बरकरार रखा: एक रिपोर्ट योग्य (REPORTABLE) फैसले में, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम कुलसचिव श्री जितेंद्र सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया, जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ के क्रियात्मक निर्देशों को बरकरार रखा।

न्यायालय पीठ ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 46(बी), जो कुलाध्यक्ष (विज़िटर) को प्रथम कुलसचिव नियुक्त करने का अधिकार देती थी, को सामान्य खंड अधिनियम (General Clauses Act), 1897 की धारा 16 के साथ पढ़ा जाना था, जिसके तहत नियुक्त करने की शक्ति रखने वाले प्राधिकारी के पास बर्खास्त करने की शक्ति भी होती है, जब तक कि इसके विपरीत कोई मंशा प्रकट न हो।

हालांकि, न्यायालय ने प्रथम कुलसचिव का कार्यकाल समाप्त होने और दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चले मुकदमे को देखते हुए उन्हें दी गई क्रियात्मक राहत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय के आदेश का क्रियात्मक निर्देश नीचे दिया गया है:

1. एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश दिनांक 25.04.2023 और उप-सचिव द्वारा पारित आदेश दिनांक 27.04.2022 को निरस्त और रद्द किया जाता है।

2. अपीलकर्ता 28.02.2022 तक की अवधि के लिए पिछले वेतन/भत्ते (बैक वेजेस/सैलरी) प्राप्त करने का हकदार होगा। प्रतिवादियों द्वारा छह सप्ताह की अवधि के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

 

मामले की मुख्य बुनियाद:

• प्रारंभिक नियुक्ति:सैन्य (DRDO) और नागरिक (NAL) दोनों एयरोस्पेस क्षेत्रों में जितेंद्र सिंह की व्यापक, उच्च-स्तरीय योग्यताओं के कारण, उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा 8 अप्रैल 2019 को राजीव गाँधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय के पहले कुलसचिव (एक संयुक्त सचिव स्तर के समकक्ष, पे लेवल 14 पद) के रूप में चुना और नियुक्त किया गया था। उन्होंने संसद के अधिनियम के अनुसार तीन साल के वैधानिक कार्यकाल के लिए 8 अप्रैल 2019 को राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय (RGNAU) के पहले कुलसचिव के रूप में कार्यभार संभाला था।

• अचानक बर्खास्तगी:नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 8 जनवरी 2020 को उनकी परिवीक्षा (प्रोबेशन) को समाप्त कर दिया, जिसमें उनकी पीठ पीछे और बिना कोई जांच किए या कारण बताओ समन जारी किए बिना, अनुशासनहीनता और अवज्ञा के आरोपों का हवाला दिया गया था।

• उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप:
क) 17 सितंबर 2021 को उच्च न्यायालय ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा पारित अवैध आदेशों को "कलंकात्मक" (Stigmatic) और "दंडात्मक" (Punitive) पाते हुए रद्द कर दिया और पूर्ण परिणामी लाभों के साथ बहाली का आदेश दिया। उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष एक अपील दायर की गई थी, जिसने एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा, इसे अवैध करार दिया, और विश्वविद्यालय को 2 महीने में नए आदेश पारित करने के लिए मामला वापस भेज दिया (p. 2)।

ख) 31 दिसंबर 2021 को, श्री जितेंद्र सिंह को भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा राजीव गाँधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय के कुलसचिव के रूप में सेवा में बहाल किया गया था। लेकिन उसी दिन उन्हें जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जल्दबाजी में एक जांच (1 घंटे की वीडियो कॉन्फ्रेंस पर) की गई और फिर से पिछली तारीख यानी 08 जनवरी 2020 से बर्खास्तगी का आदेश पारित कर दिया गया।

ग) 22 मई 2024 को, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंत्रालय के 2022 के संशोधित बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय का विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की अनुशासनात्मक कार्रवाइयों पर शून्य क्षेत्राधिकार है, और आंतरिक कर्मचारी मामलों में कुलाध्यक्ष (भारत के राष्ट्रपति) की कोई भूमिका नहीं है।

घ) परिणामी राहत: उच्च न्यायालय ने सिंह की बर्खास्तगी को अवैध घोषित किया और उन्हें 8 जनवरी 2020 से 28 फरवरी 2022 तक के उनके मूल तीन साल के कार्यकाल के लिए पूरा पिछला वेतन और भत्ता प्रदान किया।

उच्च न्यायालय ने राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय अधिनियम के आधार पर एक सख्त समयसीमा तय करते हुए पिछला वेतन देने से इनकार करने के मंत्रालय के प्रयास को खारिज कर दिया:

• प्रभावी प्रारंभ तिथि: 8 जनवरी 2020 (उनकी अवैध बर्खास्तगी की तारीख)।
• प्रभावी समाप्ति तिथि: 07 अप्रैल 2022 (वह सटीक तारीख जब कुलसचिव के रूप में उनका प्रारंभिक वैधानिक तीन वर्षीय कार्यकाल समाप्त हुआ था)।
• कुल गणना अवधि: 25 महीने और 20 दिन।

सुप्रीम कोर्ट के मामले 'कुलपति- राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय और अन्य बनाम जितेंद्र सिंह और अन्य' में, कानूनी टीमों ने मौलिक रूप से विपरीत तर्क प्रस्तुत किए। मुख्य संघर्ष राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों पर केंद्रीय मंत्रालयों की कार्यकारी शक्ति और सख्त संस्थागत स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाने का है।
चूंकि, मई 2024 में उच्च न्यायालय द्वारा निर्णय दिए जाने तक उनका निश्चित तीन साल का कार्यकाल स्वाभाविक रूप से पूर्ण हो चुका था, इसलिए भौतिक बहाली कानूनी रूप से असंभव थी। इसलिए,न्यायालय ने बहाली की राहत को उस अधूरे/शेष कार्यकाल का पूर्ण वेतन का भुगतान के आदेश में परिवर्तितकिया।

लगभग 06 वर्ष से चल रहे लंबे कानूनी संघर्ष के बाद,यह प्रथम कुलसचिव के लिए एक बड़ी विजय है और माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस प्रतिष्ठित एयरोस्पेस वैज्ञानिक को न्याय प्रदान करना है।

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