रायबरेली ।विश्व पर्यावरण दिवस पर क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान रायबरेली पर आचार्य द्वारा अपने समस्त स्टाफ के साथ पौधारोपण किया गया, तथा रोपित पौधों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए छोटे-बड़े पेड़ एवं ऊंचे दरख्तों का बड़ा महत्व है। पृथ्वी पर जीवन से लेकर समस्त जीवितो को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति हरे पेड़ों के द्वारा ही की जाती है। आजकल विकास की अंधी दौड़ में वृक्षों की कटान बहुत अधिक हो रही है, इसके विपरीत पौधरोपण कर उनके संरक्षण पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है जिसके कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ना लाजमी है। भारतवर्ष में प्रतिवर्ष अनगिनत पौधे किए जाते हैं परंतु रोपण के बाद उनके संरक्षण पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है इसके कारण 60 से 70% पौधे मर जाते हैं तथा बचे हुए पौधों को अन्ना प्रथा के कारण जानवर चर जाते हैं।
बहुत कम बचे हुए पुराने दरख्तों को या तो लकड़ी की आवश्यकता के कारण या सड़क निर्माण की जिज्ञासा के कारण उनको काट डाला जाता है। यदि यही स्थिति रही तो जिंदा रहने के लिए शीघ्र ही जल एवं ऑक्सीजन के लिए त्राहि-त्राहि मचेगी ।इस लिए हम सभी का कर्तव्य है कि इस ओर विशेष ध्यान दिया जाए ।
पौधरोपण के समय इं०एस०एस०राना, शैलेन्द्र सिंह गौर वरिष्ठ प्रशिक्षक, एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
रिपोर्ट देवेंद्र कोरी